सन ऑफ सरदार 2 – अजय देवगन की वापसी एक बार फिर हंसी, एक्शन और देसी तड़के मगर सामान्य कथानक एवं प्लॉट के साथ!
रेटिंग: ⭐⭐⭐✰✰ (3/5)
कहानी में क्या है खास?
“Son of Sardaar 2” सीक्वल है 2012 में आई हिट फिल्म Son of Sardaar का। इस बार भी अजय देवगन अपने चिर-परिचित अंदाज में नजर आते हैं — पूरी देसी स्टाइल में, बाइक्स पर स्टंट करते, पंच मारते तथा दर्शको का दिल जीतने की कोशिश करने का प्रयास करते हुए नज़र आते है ।
फिल्म की कहानी पंजाब की मिट्टी, पारिवारिक दुश्मनी और मजेदार टकराव के इर्द-गिर्द घूमती है। हालांकि प्लॉट कुछ नया नहीं है, लेकिन इसकी प्रेजेंटेशन, कॉमिक टाइमिंग और रंग-बिरंगे किरदार द्वारा इसे एंटरटेनिंग बनाने की कोशिश की गयी हैं।
अभिनय और किरदार
- अजय देवगन इस बार भी पूरे जोश में नजर आते हैं। उनका एक्शन, वन लाइनर डायलॉग्स और पंजाबी स्वैग देखने लायक है।
- संजय दत्त का कैमियो दर्शकों के लिए खास सरप्राइज पैकेज नहीं रहा है।
- सोनाक्षी सिन्हा को इस बार ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला, लेकिन जहां और जितना भी मिला , उस किरदार को अपना 100 प्रतिशत नहीं दे सकी।
- सपोर्टिंग कास्ट, खासकर पंजाब की लोकेशन और लोकल किरदार, कहानी में जान डालने का प्रयास करते नज़र आते हैं।
संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का म्यूजिक ठीक-ठाक है। कुछ गाने थिरकने पर मजबूर कर देते हैं, खासकर भांगड़ा स्टाइल ट्रैक्स।
कैमरा वर्क और लोकेशन का उपयोग शानदार है — पंजाब की खूबसूरती को अच्छे से कैद किया गया है।
कमजोरियां
- कहानी में नयापन नहीं है ।
- सेकंड हाफ थोड़ा खिंचता है एवं दर्शको को बांध कर रखने में असमर्थ नज़र आता है ।
- कुछ जोक्स रिपीटेड और ओवर-द-टॉप लग सकते हैं।
- इस फिल्म का कथानक कमज़ोर है जो घटनाओ के क्रम को सही से दर्शा नहीं पाया है ।
- संवाद और शैली सामान्य स्तर के है ।
निष्कर्ष:
अगर आप एक हल्की-फुल्की, मसाला से भरपूर फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें देसी एक्शन, हास्य और पारिवारिक भावनाएं हों — तो “Son of Sardaar 2” आपको निराश नहीं करेगी।
यह फिल्म उन दर्शकों के लिए परफेक्ट है जो अजय देवगन की फुल टू एंटरटेनिंग फिल्मों के फैन हैं।
देखनी चाहिए या नहीं?
अगर आप फैमिली के साथ एक मजेदार फिल्म देखना चाहते हैं, तो ज़रूर देखिए!
