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यूरोपीय संघ में अवैध प्रवास: क्या है EU की नई वापसी नीति और इसके पीछे की रणनीति?

यूरोपीय संघ (EU) हर साल लाखों अवैध प्रवासियों को अपने देश की सीमा से बाहर जाने का आदेश देती है, जो बिना वैध वीज़ा या निवास अनुमति के यहाँ  रह रहे होते हैं। लेकिन इनमें से केवल 20% लोग ही वास्तव में यूरोपीय संघ छोड़ते हैं। यही वजह है कि अब यूरोपीय संघ ऐसी नई और एक समान नीति बना रहा है, जिससे उन लोगों की तेज़ और असरदार वापसी सुनिश्चित की जा सके, जिन्हें वहां रहने का अधिकार नहीं है।


EU की वापसी नीति (Return Directive) क्या है?

यूरोपीय संघ की Return Directive सबसे पहले साल 2008 में लागू की गई थी। इसका उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे लोगों की वापसी की एक प्रक्रिया तय करना। 2013 में हुई समीक्षा में सामने आया कि इस नीति ने कुछ हद तक सकारात्मक परिणाम दिए — जैसे कि स्वैच्छिक वापसी को बढ़ावा देना और नजरबंदी की अवधि पर सीमा तय करना

हालांकि, अब तक EU के अलग-अलग देशों में वापसी के नियमों में फर्क था, जिससे एक जैसे हालात में रह रहे अवैध प्रवासियों को कहीं अवैध माना जाता, तो कहीं नहीं।


नई योजना में क्या बदलाव होंगे?

मार्च 2025 में यूरोपीय आयोग ने Common European System for Returns नाम से एक प्रस्ताव पेश किया है। इसका मकसद है सभी EU देशों में वापसी की प्रक्रिया को एक जैसा, आसान और तेज़ बनाना। इस प्रस्ताव के मुख्य बिंदु हैं:


2023 में क्या हुआ?


स्वैच्छिक और जबरन वापसी में फर्क

जब कोई व्यक्ति खुद से लौटने का फैसला करता है और सरकार से सहयोग करता है, तो उसे स्वैच्छिक वापसी कहा जाता है। कई देशों में सरकार इसे आसान बनाने के लिए आर्थिक या यात्रा सहायता भी देती है। वहीं, जब व्यक्ति सहयोग नहीं करता, तो उसे जबरन निकाला जाता है, जिसे forced return कहा जाता है।


आगे की राह –

यूरोपीय संघ अब ऐसी नीतियां बना रहा है, जिससे अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों की वापसी एक समान, तेज़ और प्रभावशाली हो सके। इससे न सिर्फ EU देशों की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि कानूनी और सुरक्षित प्रवास के रास्ते भी ज्यादा स्पष्ट होंगे।

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